राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक भारतीय दक्षिणपंथी हिंदुत्व स्वयंसेवी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
संक्षिप्त में भाग 1
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक भारतीय दक्षिणपंथी हिंदुत्व स्वयंसेवी[1] अर्धसैनिक संगठन है।[9] यह संघ परिवार नामक हिंदुत्व संगठनों के एक बड़े समूह का जनक और नेतृत्वकर्ता है, जिसमें जो । मोहन भागवत वर्तमान में आरएसएस के सरसंघचालक (मुख्य) हैं, जबकि दत्तात्रेय होसबाले सरकार्यवाह (महासचिव) के रूप में कार्यरत हैं। 27 सितंबर 1925 को स्थापित,[10] इस संगठन का प्रारंभिक उद्देश्य चरित्र निर्माण करना और “हिंदू अनुशासन” स्थापित करना था, ताकि हिंदू समुदाय को संगठित कर एक हिंदू राष्ट्र की स्थापना की जा सके।[11] यह संगठन हिंदुत्व की विचारधारा के प्रसार के माध्यम से हिंदू समुदाय को “सशक्त” बनाने तथा भारतीय संस्कृति और उसकी “सभ्यतागत मूल्यों” को बनाए रखने का लक्ष्य रखता है। दूसरी ओर, आरएसएस को “हिंदू श्रेष्ठतावाद” के सिद्धांत पर आधारित संगठन के रूप में भी वर्णित किया गया है। इस पर अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के प्रति असहिष्णुता के आरोप भी लगाए गए हैं।[12]
स्वतंत्रता के बाद, यह एक प्रभावशाली हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में विकसित हुआ, जिसने कई संबद्ध संगठनों की स्थापना की, जिनके माध्यम से स्कूल, चैरिटी और क्लब संचालित किए गए। इसे 1947 में चार दिनों के लिए प्रतिबंधित किया गया था, और बाद में तीन बार और प्रतिबंधित किया गया—पहली बार 1948 में जब नाथूराम गोडसे, जो आरएसएस से जुड़ा था, ने महात्मा गांधी की हत्या की; फिर आपातकाल (1975–1977) के दौरान; और तीसरी बार 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद।
इतिहास
संस्थापना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर सन् १९२५ में विजयादशमी के दिन डॉ॰ केशव हेडगेवार द्वारा की गयी थी।
सबसे पहले ५० वर्ष बाद १९७५ में जब आपातकाल की घोषणा हुई तो तत्कालीन जनसंघ पर भी संघ के साथ प्रतिबंध लगा दिया गया। आपातकाल हटने के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हुआ और केन्द्र में मोरारजी देसाई के प्रधानमन्त्रित्व में मिलीजुली सरकार बनी। १९७५ के बाद से धीरे-धीरे इस संगठन का राजनैतिक महत्व बढ़ता गया और इसकी परिणति भाजपा जैसे राजनैतिक दल के रूप में हुई जिसे आमतौर पर संघ की राजनैतिक शाखा के रूप में देखा जाता है। संघ की स्थापना के ७५ वर्ष बाद सन् २००० में प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एन०डी०ए० की मिलीजुली सरकार भारत की केन्द्रीय सत्ता पर आसीन हुई।
सरसंघचालक
- डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार उपाख्य डॉक्टरजी (१९२५ - १९४०)
- माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य गुरूजी (१९४० - १९७३)
- मधुकर दत्तात्रय देवरस उपाख्य बालासाहेब देवरस (१९७३ - १९९३)
- प्रोफ़ेसर राजेंद्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया (१९९३ - २०००)
- कृपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन उपाख्य सुदर्शनजी (२००० - २००९)
- डॉ॰ मोहनराव मधुकरराव भागवत (२००९ -)
https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/thumb/b/b8/Balasaheb_deoras.jpg/120px-Balasaheb_deoras.jpg
शताब्दी समारोह और मुख्य आकर्षण
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने विजयादशमी, 2 अक्टूबर, 2025 को 100वां वर्ष पूरा किया। [13][14]
स्मारक डाक टिकट और सिक्का
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक स्मारक सिक्के का अनावरण किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस सिक्के पर पहली बार भारतीय मुद्रा पर भारत माता की तस्वीर अंकित है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष डाक टिकट और ₹100 का स्मारक सिक्का जारी किया। [15]भारतीय मुद्रा के इतिहास में पहली बार, सिक्के पर भारत माता की छवि अंकित है।[16]
मुख्य अतिथि
मध्य में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 2 अक्टूबर, 2025 को (आरएसएस) विजयादशमी उत्सव में मुख्य अतिथि थे, जो संगठन के शताब्दी समारोह का भी प्रतीक था। [17] यह कार्यक्रम नागपुर के रेशमबाग मैदान में आयोजित किया गया था, जहाँ 1925 में आरएसएस की स्थापना हुई थी। कोविंद ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि दोनों व्यक्तियों ने उनके जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सामाजिक एकता और सद्भाव के उनके दर्शन में समानताएँ बताईं।[18]
संरचना
संघ में संगठनात्मक रूप से सबसे ऊपर सरसंघचालक का स्थान होता है जो पूरे संघ का दिशा-निर्देशन करते हैं। सरसंघचालक की नियुक्ति मनोनयन द्वारा होती है। प्रत्येक सरसंघचालक अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करता है। वर्तमान में संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत हैं। संघ के ज्यादातर कार्यों का निष्पादन शाखा के माध्यम से ही होता है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर सुबह या शाम के समय एक घंटे के लिये स्वयंसेवकों का परस्पर मिलन होता है। वर्तमान में पूरे भारत में संघ की लगभग पचपन हजार से ज्यादा शाखा लगती हैं। वस्तुत: शाखा ही तो संघ की बुनियाद है जिसके ऊपर आज यह इतना विशाल संगठन खड़ा हुआ है। शाखा की सामान्य गतिविधियों में खेल, योग, वंदना और भारत एवं विश्व के सांस्कृतिक पहलुओं पर बौद्धिक चर्चा-परिचर्चा शामिल है।
२०११ में नागपुर में संघ का एक कार्यक्रम
संघ की रचनात्मक व्यवस्था इस प्रकार है:
- केंद्र
- क्षेत्र
- प्रान्त
- विभाग
- जिला
- तालुका/तहसील/महकमा
- नगर
- खण्ड
- मण्डल
- ग्राम
शाखा
